Thursday, 31 July 2025

श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 2 श्लोक संख्या 9 और 10

 अध्याय 2 

श्लोक संख्या 9

श्लोक:

एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप।

न योत्स्य इति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह।।

भावार्थ:

संजय कहते हैं, "हे परंतप धृतराष्ट्र! इस प्रकार हृषीकेश (इंद्रियों के स्वामी श्रीकृष्ण) से कहकर, शत्रुओं को जीतने वाले गुडाकेश (अर्जुन) ने 'मैं युद्ध नहीं करूँगा' ऐसा कहकर चुप हो गए।"

व्याख्या:

इस श्लोक में संजय धृतराष्ट्र को कुरुक्षेत्र में घटित घटना के बारे में बता रहे हैं। यहाँ अर्जुन के लिए दो विशेषणों का प्रयोग किया गया है: गुडाकेश (निद्रा को जीतने वाला) और परंतप (शत्रुओं को कष्ट पहुँचाने वाला)। ये विशेषण अर्जुन की स्वाभाविक वीरता और सामर्थ्य को दर्शाते हैं। फिर भी, वे कृष्ण के सामने अपनी असमर्थता व्यक्त करते हैं। वे स्पष्ट रूप से कहते हैं कि "मैं युद्ध नहीं करूँगा" और उसके बाद चुप हो जाते हैं। यह चुप्पी केवल उनकी वाणी का रुकना नहीं है, बल्कि यह उनकी मानसिक और भावनात्मक हार को दर्शाती है। वे युद्ध के मैदान में होते हुए भी मानसिक रूप से युद्ध से भागने का निर्णय लेते हैं। यह स्थिति अर्जुन के भीतर चल रहे गहरे द्वंद्व को उजागर करती है।

श्लोक संख्या 10

श्लोक:

तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत।

सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः।।

भावार्थ:

संजय कहते हैं, "हे भरतवंशी धृतराष्ट्र! दोनों सेनाओं के बीच में शोक से ग्रस्त हुए अर्जुन से हृषीकेश (भगवान श्रीकृष्ण) ने हँसते हुए से यह वचन कहा।"

व्याख्या:

यह श्लोक एक महत्वपूर्ण बदलाव को चिह्नित करता है। अर्जुन के मौन हो जाने के बाद, अब भगवान कृष्ण बोलते हैं। यहाँ उनके लिए हृषीकेश (इंद्रियों के स्वामी) विशेषण का उपयोग किया गया है, जो यह दर्शाता है कि वे अर्जुन की इंद्रियों और मन की व्याकुलता को भली-भाँति जानते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कृष्ण अर्जुन की दुर्दशा को देखकर "प्रहसन्निव" यानी हँसते हुए से बोलते हैं। यह हँसी उनकी करुणा या उपहास का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि वे अर्जुन की समस्या की जड़ को समझते हैं और जानते हैं कि इसका समाधान कितना सरल है। यह हँसी उनकी निर्लिप्तता और ज्ञान की परिपूर्णता को दर्शाती है। वे अर्जुन को उस अज्ञान से बाहर निकालने के लिए तैयार हैं जिसमें वह फँसा हुआ है।

लेखक एवं संकलन कर्ता 

डॉ राधेश्याम गुप्ता 

1 अगस्त 2025

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