*गीता का कर्मयोग* :
शांतिपूर्ण जीवन और संबंधों का रहस्य
भगवद गीता केवल एक प्राचीन ग्रंथ नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक है। इसका केंद्रीय संदेश, कर्मयोग, हमें सिखाता है कि हम अपने दैनिक जीवन को कैसे जिएं और तनाव से बचें।
गीता का सबसे महत्वपूर्ण उपदेश है: " *कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।"* इसका अर्थ है कि हमारा नियंत्रण केवल हमारे कर्म पर है, उसके परिणाम पर नहीं। हम अक्सर अपने कामों के नतीजों की चिंता में डूब जाते हैं, जिससे हमारा वर्तमान का कार्य और मन दोनों प्रभावित होते हैं।
*लड़ाई-झगड़े और मनमुटाव से बचें:* गीता हमें सिखाती है कि दूसरों के कर्मों या व्यवहार पर हमारा सीधा नियंत्रण नहीं होता। जब हम दूसरों से अपनी अपेक्षाओं को त्यागकर, अपने स्वयं के कर्मों (जैसे अपनी प्रतिक्रिया, अपनी वाणी) पर ध्यान देते हैं, तो अनावश्यक वाद-विवाद और मनमुटाव से बचा जा सकता है। याद रखें, आप दूसरों को नहीं बदल सकते, पर अपनी प्रतिक्रिया बदल सकते हैं।
*सीनियर सिटीजन्स के लिए:*
जीवन के इस पड़ाव पर, जब बहुत से परिणाम (जैसे बच्चों का भविष्य, स्वास्थ्य) हमारे सीधे नियंत्रण में नहीं होते, तब फल की चिंता छोड़ना मानसिक शांति देता है। अपनी ऊर्जा को वर्तमान में उपलब्ध कार्यों पर केंद्रित करें। गुस्सा, लड़ाई-झगड़ा या मारपीट केवल हमें और हमारे आसपास के लोगों को दुख देती है। गीता हमें शांत मन से जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
भगवान कृष्ण कहते हैं, " *योगः कर्मसु कौशलम्"*
— कर्मों में कुशलता ही योग है। इसका मतलब है कि आप जो भी काम करें, उसे पूरी लगन और एकाग्रता से करें। जब हम परिणाम की चिंता छोड़कर अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो हमारा मन शांत रहता है। यही कर्मयोग है—निष्काम भाव से कार्य करना, जिससे जीवन में शांति और संतुष्टि आती है।
लेखक
डॉ राधेश्याम गुप्ता
20 जून 2025
(मन को शांत रखें, विषम परिस्थितियों का ध्यान में रखें जैसे की स्वास्थ्य ठीक रखना सीनियर सिटीजन का सबसे महत्वपूर्ण दैनिक क्रिया का अंग है।
इसको सर्वोपरि प्राथमिकता दें।
रुचिकर भोजन पर विशेष ध्यान दें , इसकी आपूर्ति पर विशेष निगरानी रखें प्रचुर मात्रा में संग्रहित करें और आनंद से जब जी चाहे उपभोग करें, बढ़ते उम्र के साथ में प्राथमिकता बदल जाती है इसे सर्वोपरि प्राथमिकता दें।
प्रसन्न रहें, प्रसन्नता का माहौल बनाएं, प्रसन्नता से मिले, प्रसन्नता से बात करें)
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