एक बार सोचिए हम घर में रहते हैं, दीवारें छत प्लास्टर दरवाजे फर्नीचर किचन भोजन की सामग्री किसकी देन है। जी हां प्रकृति। हमारे पास है लेकिन देखने की दृष्टि नहीं है। इसी प्रकार हर पल हम प्रकृति के पास हैं जो कुछ भी हमें मिला है सब कुछ उसने दिया है । मन से देखें , हम अपने घर से प्यार करते हैं, उसकी हर वस्तु का ख्याल रखते हैं। भूल जाते हैं कि यह प्रकृति है। प्रकृति को समझिये, संजोयिये यह मूल्यवान है। प्रणाम करिए । आपके भाव बदल जाएंगे।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
डॉ राधेश्याम गुप्ता के के विचार
वित्तीय दर्शन “सत्य, श्रम और ज्ञान के संग निवेश — एक स्वच्छ मार्ग की खोज” जीवन में धन कमाने से अधिक कठिन है — उसे ईमानदारी, विवेक और...
-
When a person reaches a certain Stage and becomes fits for enlightenment The same god whom he was worshiping the same God comes as a...
-
*गीता का कर्मयोग* : शांतिपूर्ण जीवन और संबंधों का रहस्य भगवद गीता केवल एक प्राचीन ग्रंथ नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन के लिए एक व्यावहारिक मार्...
-
वित्तीय दर्शन “सत्य, श्रम और ज्ञान के संग निवेश — एक स्वच्छ मार्ग की खोज” जीवन में धन कमाने से अधिक कठिन है — उसे ईमानदारी, विवेक और...
No comments:
Post a Comment