*छोटेअहंकार और मूड स्विंग से पीड़ित:* _
रिटायर्ड दंपति के लिए_
_ सुझाव_
वरिष्ठ नागरिकों में एवं बिना आर्थिक समस्या वाले पति पत्नी छोटे-मोटे अहंकार और मूड स्विंग (रिडयूसिग हर्मोन) के कारण चिल्लाहट, गाली-गलौज या मारपीट का सामना कर सकते हैं।
उम्र के साथ कमज़ोर स्वास्थ्य, और चिड़चिड़ा होना प्रकृति की देन है ।
*सरकारी पावर और पहचान खोने या बोरियत से तनाव बढ़ता है प्रकृति की देन है।*
तीन सुझाव:
*ध्यान से सुनें* :
बिना टोके भावनाओं को समझें, अहंकार कम होगा। *
*विराम लें:**
गुस्से में 10 मिनट रुकें, मूड स्विंग नियंत्रित होगा।
*भूतकाल की अच्छी यादों को संग्रहित करें* ।
*मध्यस्थता लें:* काउंसलर या परिवार की मदद ले।
( *परिवार जनों का उत्तरदायित्व कड़े शब्दों में आदर सहित समझा दें कि आपस में हिंसा किसी भी तरह से व्यवहारिक नहीं है,* *पुनरावृत्ति न हो)*
*_
*कानूनी जोखिम* : **_घरेलू हिंसा या वरिष्ठ नागरिक कानून*_ (भारत)*पति-पत्नी के बीच विवाद हो सकता है। *
के तहत गाली-गलौज या मारपीट से जुर्माना, जेल या
*हल्की गतिविधियाँ** (योग, सामुदायिक कार्य) और काउंसलिंग अपनाएँ।
*दुर्व्यवहार हो तो हेल्पलाइन की मदद ले।*
लेखक
डॉ राधेश्याम गुप्ता
दिनांक 18 जून 2025
प्रकृति में परिवर्तन एक स्वाभाविक सी प्रक्रिया है निर्धारित उम्र को प्राप्त करने वाले जीव जन्तु, मनुष्य और पेड़ पौधे में धीरे-धीरे उनकी सामान्य क्रिया कम होने लगती है। यह प्रकृति की देंन है। लेखक का उद्देश्य उन दम्पतियो के लिए जो प्रकृति की मार झेल रहे हैं
सुनहरा सामान्य जीवन बिताने के उद्देश्य से है।
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