Saturday, 28 June 2025

मां आनंदमई और महर्षि रमण के उपदेश

  श्रीआनंदमयी माँ

    सच्ची मित्रता पर:

आपका सच्चा मित्र वह है जो आपको आपके परम मित्र की ओर ले जाने वाला मार्ग दिखाता है। जो आपको निश्चित मृत्यु और इंद्रिय सुख के रास्ते पर ले जाता है, वह आपका मित्र या शुभचिंतक नहीं है। वह आपका शत्रु है। वह आपको आत्महत्या का रास्ता दिखा रहा है। उसकी संगति से बचें। जो आपको अमरत्व के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है, आपके परम मित्र की खोज में जाने के लिए प्रोत्साहित करता है, वही आपका सच्चा मित्र है। यह शरीर आप सभी का मित्र है, क्या आपको ऐसा नहीं लगता?

प्रार्थना पर:

यदि आपको सांसारिक चीजों के लिए प्रार्थना करनी ही है, तो उसी से प्रार्थना करें, लेकिन सबसे उत्तम प्रार्थना स्वयं भगवान के लिए है।

(स्रोत: "इन योर हार्ट - इज़ माय एबोड" बिथिका मुखर्जी द्वारा, पृष्ठ 56)

दुख पर:

दुख केवल भगवान की शरण में ही दूर होता है। यह केवल भगवान की कृपा है कि मनुष्य अपने कर्मों के फलस्वरूप दुख भोगता है। यदि इस दुख को उनकी कृपा के रूप में स्वीकार किया जाए, तो यह अंततः कल्याण की ओर ले जाता है।

(स्रोत: "माँ इन हर वर्ड्स")

श्री रमण महर्षिध्यान और आत्म-जांच पर:

भगवान के रूपों पर ध्यान और मंत्रों के जप के माध्यम से मन एकाग्र हो जाता है। मन हमेशा भटकता रहेगा। जैसे कि जब एक हाथी को उसकी सूंड में पकड़ने के लिए एक जंजीर दी जाती है, तो वह केवल उसी जंजीर को पकड़कर चलता है और कुछ नहीं, उसी तरह जब मन किसी नाम या रूप में व्यस्त हो जाता है, तो वह केवल उसी को ग्रहण करता है। जब मन असंख्य विचारों के रूप में फैलता है, तो प्रत्येक विचार कमजोर हो जाता है; लेकिन जैसे-जैसे विचार समाहित होते जाते हैं, मन एकाग्र और मजबूत हो जाता है; ऐसे मन के लिए आत्म-जांच आसान हो जाती है।

डॉ राधेश्याम गुप्ता 

28 जून 2025

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