Thursday, 12 June 2025

प्रकृति नियंता

 प्रकृति, जीवन की नियंता - भाग 2

डॉ. राधेश्याम गुप्ता

प्रकृति वह नियंता है, जो अपने सूक्ष्म तंत्रों से जीवन को रचती और संचालित करती है। मानव शरीर इसका लघु रूप है—60-70% जल नदियों से आता है, और हड्डियाँ, जो 15% वजन बनाती हैं, कैल्शियम से निर्मित हैं। यह कैल्शियम नदियों, पहाड़ों, और मिट्टी में प्रचुर है, जिसे प्रकृति विटामिन डी और सूर्य की किरणों से संतुलित करती है।सूक्ष्म हार्मोन्स, जैसे ऑक्सीटोसिन और सेरोटोनिन, प्रेम और शांति देते हैं, जबकि जिंक और आयोडीन प्रजनन और स्वास्थ्य को संचालित करते हैं। प्रकृति का नियंत्रण पारिस्थितिकी तंत्र में भी दिखता है—जल चक्र, नाइट्रोजन चक्र, और बैक्टीरिया की गतिविधियाँ संतुलन बनाए रखती हैं। अंडे से मुर्गी या बच्चे से बूढ़े तक, हर जीवन चक्र उसके नियमों से चलता है।प्रकृति एक आध्यात्मिक गुरु भी है। सूर्य की रोशनी सेरोटोनिन बढ़ाती है, और प्रियजन का आलिंगन ऑक्सीटोसिन देता है। वह हमें संयम और एकता सिखाती है। जंगलों और नदियों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है, क्योंकि प्रकृति का असंतुलन हमारे जीवन को प्रभावित करता है।आइए, प्रकृति के नियंता स्वरूप के साथ तालमेल बिठाएँ। उसके जल, कैल्शियम, और चक्रों का सम्मान करें, और उसके आध्यात्मिक पाठों को अपनाएँ। यह करिश्मा आँखों से नहीं दिखता, बस स्वतः ही चलता है।

No comments:

Post a Comment

डॉ राधेश्याम गुप्ता के के विचार

        वित्तीय दर्शन “सत्य, श्रम और ज्ञान के संग निवेश — एक स्वच्छ मार्ग की खोज” जीवन में धन कमाने से अधिक कठिन है — उसे ईमानदारी, विवेक और...